Yadi Mein Shiksha Mantri Hota Essay In Hindi

यदि मैं भारत का शिक्षा मंत्री होता Essay On If I Were The Education Minister Of India In Hindi Language

अपने विद्यालय में ‘शिक्षक दिवस’ के अवसर पर आयोजित भव्य समारोह में मैं एक शिक्षा मंत्री के तौर पर भाषण दे रहा था | इस भाषण में मैं भारत की प्रगति के लिए वर्तमान शिक्षा-प्रणाली एवं शिक्षा के उद्देश्यों में परिवर्तन की बातें कर रहा था | अभी मेरी बातें पूरी भी नहीं हुई थी कि अचानक किसी ने मुझे आवाज दी और मेरी नींद टूट गई | नींद टूटने के साथ ही मेरा खूबसूरत स्वप्न भी अधूरा रह गया, लेकिन नींद से जागने के बाद मैं सोचने लगा कि ‘यदि मैं वास्तव में कभी शिक्षा मंत्री बन सका तो स्वप्न में शिक्षा में सुधार के संदर्भ में व्यक्त अपनी बातों को अवश्य पूरा करने की कोशिश करूंगा |’

अब शिक्षा के पर्याय के रूप में ‘मानव संसाधन विकास’ पद का प्रयोग किया जाता है तथा शिक्षा मंत्री को अब मानव संसाधन विकास मंत्री कहा जाता है | यदि मैं शिक्षा मंत्री अर्थात मानव संसाधन विकास मंत्री, होता तो निम्नलिखित कार्यो को पूरा करने की यथासंभव कोशिश करता-

वर्तमान शिक्षा प्रणाली एंव इसके उद्देश्यों में परिवर्तनसमाज एंव देश के हित के लिए शिक्षा के उद्देश्यों का निर्धारण अवश्यक होता है | चूंकि समाज एंव देश में समय के अनुसार परिवर्तन होते रहते हैं, इसलिए शिक्षा प्रणाली एवं इसके उद्देश्यों में भी समय के अनुसार परिवर्तन आवश्यक है | उदाहरण के लिए, प्राचीन काल में शिक्षा के उद्देश्य चरित्र-निर्माण, व्यक्तित्व विकास, संस्कृति का संरक्षण, समाजिक कर्तव्यों का विकास इत्यादि थे, किन्तु वर्तमान काल में मनुष्य के विकास के लिए इन उद्देश्यों के अतिरिक्त व्यावसायिक एवं तकनीकी शिक्षा पर जोर दिया जाना आवश्यक है | वर्तमान समय में कंप्यूटर की शिक्षा के बिना मनुष्य को लगभग अशिक्षित ही माना जाता है, क्योंकि अब दैनिक जीवन में कंप्यूटर का प्रयोग बढ़ा है, इसलिए मैं शिक्षा मंत्री के रूप में वर्तमान सैद्धान्तिक शिक्षा पर जोर देने वाली शिक्षा के स्थान पर व्यवहारिक शिक्षा को महत्व देने वाली व्यावसायिक एंव तकनीकी शिक्षा की व्यवस्था करवाता | इसके साथ ही शिक्षा में कंप्यूटर के प्रयोग को बढ़ावा भी देता |

प्रौढ़ शिक्षा के लिए उचित व्यवस्था– प्रौढ़ शिक्षा का तात्पर्य उन प्रौढ़ व्यक्तियों को शिक्षा प्रदान करना है, जिन्होंने विद्यालय में किसी प्रकार की शिक्षा प्राप्त नहीं की है | प्रौढ़ शिक्षा का उद्देश्य लोग प्रायः लिखने-पढ़ने एवं गणित का सामान्य ज्ञान प्राप्त करने तक सीमित समझते हैं | किन्तु, इन मूल उद्देश्यों के साथ-साथ प्रौढ़ शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति के बौद्धिक विकास के साथ ही उसका सामाजिक विकास करना भी है, ताकि वह अपने सामाजिक, राजनीतिक तथा आर्थिक अधिकारों एवं कर्तव्यों को समझ सके | प्रौढ़ शिक्षा के इन महत्त्वों को देखते हुए मैं इसकी समुचित व्यवस्था करवाता |

स्त्री शिक्षा के लिए उचित व्यवस्था– किसी भी देश की प्रगति तब तक नहीं हो सकती जब तक वहां की नारियों की प्रगति न हो | प्राचीन काल में भारत में नारियों को भी पुरुषों के समान शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध थे | किन्तु, विदेशी आक्रमणों एवं अन्य कारणों से नारियों को शिक्षा प्राप्त करने से वंचित किया जाने लगा एवं समाज में पर्दा-प्रथा, सती-प्रथा जैसी कुप्रथाएं व्याप्त हो गई | स्त्रियों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध नहीं होने का कुप्रभाव समाज पर भी पड़ा | इसलिए समाज के वास्तविक विकास के लिए स्वतंत्रता के बाद स्त्री शिक्षा की आवश्यकता महसूस की गई | स्वतंत्रता के 70 से अधिक वर्षों के बाद भी भारत में स्त्री साक्षरता दर में उचित वृद्धि नहीं हुई है | इसलिए मैं स्त्री शिक्षा पर विशेष जोर देता |

दूरस्थ शिक्षा का प्रचारप्रसार– कम आय, अधिक आयु या शिक्षण संस्थान से दूरी जैसे कारणों से पूर्णकालिक शिक्षा प्राप्त करने से वंचित लोगों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने, अपना कैरियर सुधारने की इच्छा रखने वाले शिक्षित व्यक्तियों को उचित एवं प्रभावी शिक्षा के अवसर उपलब्ध करवाने तथा रोजगार में लगे व्यक्तियों को उनकी रुचियों एवं उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध कराकर उनकी आर्थिक प्रोन्नति के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए मैं एक शिक्षा मंत्री के रूप में दूरस्थ शिक्षा का प्रचार-प्रसार करता |

शिक्षा को समाजिक विकास का साधन बनाना– शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना होता है | इसलिए शिक्षा का उपयोग सामाजिक विकास के साधन के रुप में मुख्यतया किया जाता है | यह राष्ट्रीय एकता एवं विकास को बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाता है | इसके द्वारा सामाजिक कुशलता का विकास होता है | यह समाज को कुशल कार्यकर्ताओं की पूर्ति करता है | यह समाज की सभ्यता एंव संस्कृति का संरक्षण, पोषण एवं उसका प्रसार करता है | यह समाज के लिए योग्य नागरिकों का निर्माण करता है | इस तरह सामाजिक सुधार एवं उसकी उन्नति में शिक्षा सहायक होती है | मैं एक शिक्षा मंत्री के रूप में इस दिशा में यथोचित प्रयास करता |

शिक्षा को आर्थिक विकास का साधन बनाना– आधुनिक युग में मानव के संसाधन के रुप में विकास में शिक्षा की भूमिका प्रमुख होती है | उचित शिक्षा के अभाव में मनुष्य कार्यकुशल नहीं बन सकता | कार्यकुशलता के बिना व्यवसायिक एवं आर्थिक सफलता प्राप्त नहीं की जा सकती | इस तरह शिक्षा द्वारा मनुष्य का आर्थिक एवं व्यवसायिक विकास होता है | मैं एक शिक्षा मंत्री के रूप में शिक्षा को आर्थिक विकास का साधन बनाता |

शिक्षा को राष्ट्रीय विकास का साधन बनाना– लगभग एक हजार वर्षों की परतंत्रता के बाद अनेक संघर्षों व बलिदानों के फलस्वरुप हमें स्वाधीनता प्राप्त हुई | स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद हमारी एकता सुदृढ़ तो हुई, परंतु हम देख रहे हैं कि संप्रदायिकता, क्षेत्रीयता, जातीयता, अज्ञानता और भाषागत अनेकता ने पूरे देश को जकड़ रखा है | ये सभी समस्याएं हमारी राष्ट्रीय एकता में बाधक हैं | धर्मनिरपेक्षता की भावना का विकास कर संप्रदायिकता दूर करने, सामाजिक सौहार्द के द्वारा जातीयता, भाषावाद एंव क्षेत्रीयता दूर करने में शिक्षा ही सहायक हो सकती है | इस तरह, शिक्षा के द्वारा ही जन जागरूकता लाकर राष्ट्रीयता का विकास किया जा सकता है | मैं एक शिक्षा मंत्री के रूप में शिक्षा को राष्ट्रीय एकता का साधन बनाता |

सबके लिए शिक्षा उपलब्ध कराने हेतु शिक्षा के अधिकार में संशोधन एंव इसका उचित कार्यान्वयन– 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए 4 अगस्त 2009 को लोकसभा में शिक्षा का अधिकार अधिनियम पारित किया गया, जो 1 अप्रैल 2010 से पूरे देश में लागू हो गया | इस अधिनियम के अनुसार, भारत के 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग वाले सभी बच्चों को मुफ्त एवं आधारभूत शिक्षा उपलब्ध कराना अनिवार्य है तथा इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए बच्चों से किसी प्रकार का कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और न ही उन्हें शुल्क अथवा किसी खर्च की वजह से आधारभूत शिक्षा लेने से वंचित करने का प्रावधान है |

इस अधिनियम की सबसे बड़ी खामी यह है कि इसमें 0-6 वर्ष आयु वर्ग और 14-18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की बात नहीं की गई है | अन्तर्राष्ट्रीय बाल अधिकार समझौते के अनुसार 18 साल तक की उम्र तक के बच्चों को बच्चा माना गया है, जिसे भारत सहित 142 देशों ने स्वीकृति प्रदान की है फिर भी 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग की शिक्षा की बात इस अधिनियम में नहीं की गई है | मैं एक शिक्षा मंत्री के रूप में जन्म के बाद बालक की सही देखभाल हो सके, इसकी व्यवस्था करवाने के साथ ही उचित समय पर उसे विद्यालय में प्रवेश दिलाने को अनिवार्य करता तथा 14-18 वर्ष के बालकों के लिए नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा की व्यवस्था करवाता | इसके लिए आवश्यकता पड़ने पर पर्याप्त संख्या में विद्यालय खोलता तथा प्रत्येक 30 छात्रों के लिए एक शिक्षक के अनुपात को पूरा करने के लिए पर्याप्त संख्या में नए शिक्षकों को नियुक्त करता |

निजी शिक्षण संस्थाओं की मनमानी पर अंकुश– स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद निजीकरण को बढ़ावा देने के लिए अनुदान एंव सरकारी सहायता के फलस्वरुप भारत में निजी शिक्षण संस्थाओं की बाढ़-सी आ गई है | स्थिति अब ऐसी हो है कि इस पर जल्द रोक न लगाई गई, तो छात्रों को स्तरीय शिक्षा मिलना मुश्किल हो जाएगा | इसकी वजह यह है कि अधिकतर निजी शिक्षण-संस्थान धन कमाने का केंद्र बनते जा रहे हैं एवं इनके द्वारा छात्रों एवं अभिभावकों का शोषण हो रहा है | इसलिए एक शिक्षा मंत्री के रूप में मैं इस बात का पूरा ध्यान रखता कि निजी शिक्षण संस्थान अपनी मनमानी न कर पाए और शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने में भी योगदान दें |

एक विद्यार्थी के जीवन में शिक्षक एक ऐसा महत्वपूर्ण इंसान होता है जो अपने ज्ञान, धैर्य, प्यार और देख-भाल से उसके पूरे जीवन को एक मजबूत आकार देता है। यहाँ दिये गये प्रत्येक निबंध एक विद्यार्थी के जीवन में एक शिक्षक के महत्व को रेखांकित करता है साथ ही उसकी भूमिका को भी स्पष्ट करेगा। ये निबंध बेहद सरल और अलग-अलग शब्द सीमाओं में दिये गये हैं जिसका उपयोग विद्यार्थी अपनी आवश्यकतानुसार कर सकते हैं।

शिक्षक पर निबंध (टीचर एस्से)

You can get below some essays on Teacher in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, and 400 words.

शिक्षक पर निबंध 1 (100 शब्द)

एक शिक्षक वो व्यक्ति होता है जो अपने विद्यार्थी को सबसे बेहतरीन शिक्षा उपलब्ध कराने के द्वारा हरेक के भविष्य को आकार देता है। हर विद्यार्थी की शिक्षा में एक शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। एक शिक्षक के पास बहुत सारे गुण होते हैं और वो अपने विद्यार्थी के जीवन को सफल बनाने में पूरी तरह से दक्ष होता है। एक शिक्षक बहुत समझदार होता है और अच्छे से जानता है कि विद्यार्थी का ध्यान पढ़ाई की ओर कैसे लगाना है।

पढ़ाई के दौरान एक शिक्षक रचनात्मकता का इस्तेमाल करता है जिससे विद्यार्थी एकाग्र हो सके। एक शिक्षक ज्ञान का भण्डार होता है और उसके पास बहुत धैर्य और विश्वास होता है जो विद्यार्थियों के भविष्य की जिम्मेदारी लेता है। शिक्षक हरेक बच्चे की क्षमता का अवलोकन करता है और उसी अनुसार उस बच्चे को पढ़ाई में मदद करता है।

शिक्षक पर निबंध 2 (150 शब्द)

शिक्षक ज्ञान, समृद्धि और प्रकाश का एक बड़ा स्रोत होता है जिससे कोई भी जीवनभर के लिये लाभ प्राप्त कर सकता है। वो हरेक के जीवन में वास्तविक प्रकाश के रुप में होते हैं क्योंकि वो जीवन में उनका रास्ता बनाने के लिये विद्यार्थियों की मदद करते हैं। वो किसी व्यक्ति के जीवन में प्रभु का दिया हुआ एक उपहार होते हैं जो बिना किसी स्वार्थ के हमें सफलता की ओर उन्मुख करते हैं। वास्तव में, शिक्षा के माध्यम से हमारे राष्ट्र के चकित कर देने वाले भविष्य के निर्माता के रुप में हम उन्हें बुला सकते हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं जो एक अच्छे व्यवहार और नैतिकता के व्यक्ति के लिये बहुत अच्छे से विद्यार्थी को शिक्षित करते हैं। वो विद्यार्थी को अकादमिक रुप से बेहतरीन बनाते हैं और जीवन में हमेशा अच्छा करने के लिये प्रोत्साहित करते हैं। वो विद्यार्थी को ज्ञान, कौशल और सकारात्मक व्यवहार से सज्जित करते हैं जिससे विद्यार्थी कभी खोया हुआ महसूस नहीं कर सकता और आगे बढ़ता है। स्पष्ट दृष्टिकोण और विचारों के माध्यम से शिक्षा के उनके लक्ष्य के बारे में वो विद्यार्थियों को हमेशा समझाते रहते हैं। बिना शिक्षक के जीवन में कोई भी मानसिक, सामाजिक और बौद्धिक रुप से विकास नहीं कर सकता है।

शिक्षक पर निबंध 3 (200 शब्द)

एक शिक्षक एक अच्छा इंसान है जो किसी युवा और अतिसंवेदनशील बच्चों के जीवन को बनाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी लेता है। अपने विद्यार्थियों को सही दिशा में शिक्षित करने के द्वारा एक शिक्षक अच्छा एहसास, गर्व और खुशी की अनुभुति कराता है। वो कभी-भी अपने अच्छे और बुरे विद्यार्थियों में भेद-भाव नहीं करता है बल्कि अपने प्रयासों से कमजोर बच्चों को भी सही रास्ते पर ले आता है। एक महान शिक्षक वो होता है जो अपने विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिये अपना पूरा जीवन दे देता है। वो सभी विद्यार्थियों को अच्छा बनाने के लिये आगे बढ़ाता है। शिक्षक सीखने की प्रक्रिया को बहुत रोचक और रचनात्मक बना देता है। पढ़ाई की ओर सकारात्मक रुप से प्रेरित करने के द्वारा शिक्षक सभी विद्यार्थियों को सही रास्ते पर लाने के लिये अपना उत्तम प्रयास करते हैं। अच्छा शिक्षक एक अच्छा प्रभाव बच्चों पर छोड़ता है।

शिक्षक, कई बार बच्चों को उनके अच्छे कार्यों के लिये पुरस्कृत भी करते हैं जबकि कई बार उन्हें गलती का एहसास कराने के लिये सजा भी देते हैं जिससे बच्चे समझ सकें ये उनके जीवन के लिये ठीक नहीं है। वो अपने विद्यार्थियों को सही और गलत के बीच में भेद करना सिखाते हैं जिससे गलत से लड़ने के बजाय वो अपने जीवन में सही कदम को चुन सकते हैं। शिक्षक समझते हैं कि सभी विद्यार्थियों के ग्रहण करने की एक सी क्षमता नहीं होती, इसलिये वो उन्हें अलग तरीके से समझाते हैं।


 

शिक्षक पर निबंध 4 (250 शब्द)

इस दुनिया में शिक्षक के पेशे को सबसे अच्छे और आदर्श पेशे के रुप में माना जाता है क्योंकि शिक्षक किसी के जीवन को बनाने में निस्वार्थ भाव से अपनी सेवा देते हैं। उनके समर्पित कार्य की तुलना किसी अन्य कार्य से नहीं की जा सकती। शिक्षक वो होते हैं, जो अपने सभी विद्यार्थियों का ध्यान रखते हैं। वो उनके खाने की आदत, स्वच्छता का स्तर, दूसरों से व्यवहार और पढ़ाई की ओर एकाग्रता की जाँच करते हैं। बच्चों को बीमारियों से बचाने के लिये वो हर हफ्ते अपने बच्चों के नाखूनों को कटवाते हैं जिससे स्वच्छता और साफ-सफाई की आदत को उनके अंदर बनाये रखा जा सके। शिक्षक स्कूलों में हर चौथे महीने में स्वास्थ्य कैंप का आयोजन करते हैं जिससे विद्यार्थियों का वजन, कद, बौद्धिक स्तर, रक्तचाप, हृदय गति, फेफड़ों की क्षमता, खून की जाँच, पेशाब की जाँच, छोटी माता प्रतिरक्षण, एमएमआर के लिये प्रतिरक्षा, चेचक, डीपीटी बूस्टर खुराक, पोलियो ड्रॉप आदि की नियमित जाँच हो सके और उनका स्वास्थ्य रिकार्ड रखा जाये।

शिक्षक कभी बुरे नहीं होते, ये केवल उनके पढ़ाने का तरीका होता है जो एक-दूसरे से अलग होता है और विद्यार्थियों के दिमाग में उनकी अलग छवि बनाता है। शिक्षक केवल अपने विद्यार्थियों को खुश और सफल देखना चाहते हैं। एक अच्छा शिक्षक कभी अपना धैर्य नहीं खोता और हर विद्यार्थी के अनुसार पढ़ाता है। हमारे शिक्षक हमें साफ कपड़े पहनने के लिये, स्वस्थ भोजन खाने के लिये, गलत भोजन से दूर रहने को, अपने माता पिता का ध्यान देने के लिये, दूसरों से अच्छा व्यवहार करने के लिये, पूरे यूनिफार्म में स्कूल आने के लिये, जीवन में कभी झूठ नहीं बोलने के लिये, सकारात्मक प्रतिक्रिया के लिये, अपने स्कूल, कॉपी, किताबों, दूसरी चीजों का ध्यान देने के लिये, पढ़ाई में एकाग्रता के लिये ईशवर से प्रार्थना करने के लिये, किसी भी दुविधा को लेकर अपने विषय शिक्षक से चर्चा करने के लिये आदि बहुत सी अच्छी बातों के लिये प्रेरित करते हैं।

शिक्षक पर निबंध 5 (300 शब्द)

विजय और सफलता पाने के लिये जीवन में शिक्षा को सबसे शक्तिशाली हथियार के रुप में माना जाता है। अपने देश के भविष्य और युवाओं के जीवन को बनाने और उसे आकार देने के लिये इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी और कार्य को करने के लिये शिक्षकों को दिया जाता है। शिक्षा की ओर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को शिक्षक निभाता है और बच्चों के वर्तमान और भविष्य को बनाता है। अपने पूरे जीवन भर ढेर सारे विद्यार्थियों को निर्देशित और शिक्षित करने के द्वारा अच्छे समाज का निर्माण करने में शिक्षक एक महान कार्य करता है। जीवन में सही रास्ता चुनने के लिये शिक्षक को भगवान द्वारा धरती पर भेजा जाता है साथ ही साथ बुरी परिस्थिति में सही फैसला करने में उन्हें सक्षम बनाता है। शिक्षक बच्चों को उनके बचपन से ही नेतृत्व करते हैं और उन्हें मानसिक, सामाजिक और बौद्धिक रुप से काबिल बनाते हैं। शिक्षक किसी सामान्य व्यक्ति की तरह होते हैं जो हमारे बीच में से ही होते हैं लेकिन वो अपने विद्यार्थियों के लिये पढ़ाने का एक अलग कार्य चुनते हैं।

मेरी सबसे प्रिय शिक्षिका कला और विज्ञान की हैं जो अपने चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान लिये रहती हैं और हमें खुश रखती हैं। अपने पढ़ाने की रणनीति में वो ढेर सारी रणनीति को जोड़ती हैं जो हम बहुत पसंद करते हैं। हम सभी को उनके पढ़ाने का तरीका बहुत पसंद है और हम सभी उनके विषय में अच्छा प्रतिशत लाते हैं। वो हमें जीवन की सच्चाई से रुबरु कराती हैं, अपने जीवन के अनुभव बताती हैं और मुश्किल परिस्थितियों से आसानी से निकलने का तरीका सिखाती हैं। वो हमारी सबसे प्रिय शिक्षिका हैं तथा सभी बच्चों को एक बराबर तरीके से समझती हैं। वो हमारे बीच में किसी से अलग व्यवहार नहीं करती और हमेशा अच्छा करने के लिये प्रेरित करती हैं। हमलोग घर पर अपने अभिभावकों से उनकी अच्छाईयों का गुणगान करते हैं। वो जानती हैं कि हमलोग केवल उन्हीं के विषय में बहुत रुचि लेते हैं इसलिये, एक दिन उन्होंने कहा कि हम सभी को हर विषय में ध्यान देना चाहिये जिससे कोई भी हमें किसी भी क्षेत्र में हरा न सके। हमें हर पहलू में मजबूत बनना चाहिये इसी वजह से हमें हर विषय को एक बराबर पढ़ना चाहिये।


 

शिक्षक पर निबंध 6 (400 शब्द)

हमारे लिये एक शिक्षक भगवान की तरफ से एक अनमोल तोहफा है। एक शिक्षक ईश्वर की तरह है क्योंकि ईश्वर पूरे ब्रह्माण्ड का निर्माता होता है जबकि एक शिक्षक को एक अच्छे राष्ट्र का निर्माता माना जाता है। शिक्षक समाज में बहुत प्रतिष्ठित लोग होते हैं जो पढ़ाने के अपने जादू के माध्यम से आम लोगों की जीवन शैली और दिमागी स्तर को बढ़ाने की जिम्मेदारी उठाते हैं। अपने बच्चों के लिये माता-पिता एक शिक्षक से बहुत उम्मीद रखते हैं। एक शिक्षक की भूमिका कक्षा से खेल के मैदान और हरेक विद्यार्थी के लिये बदलती रहती है। हरेक के जीवन में शिक्षक बहुत महत्वपूर्ण इंसान होता है जो हमारे जीवन में अलग-अलग कार्य करता प्रतीत होता है।

कक्षा में आने से पहले, एक अच्छा शिक्षक रोज के शिक्षा के अपने लक्ष्य को सुनिश्चित करता है। हर शिक्षक के पढ़ाने की अपनी अलग खासियत होती है। वो अपने ज्ञान, कौशल और व्यवहार में हर विषय के लिये बदल सकते हैं। वो अपना सबसे बेहतरीन प्रयास करते हैं और जीवन में हमको हमारे लक्ष्य तक पहुंचने में बहुत मदद करते हैं। सभी के जीवन में स्कूली जीवन सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि यही वो समय होता है जब लोग जीवन की मूल बातें और अलग-अलग विषय सीखते हैं। हम सभी अपना लक्ष्य स्कूल के समय में ही तय कर लेते हैं जो हमारे राष्ट्र के विकास का फैसला करता है। हरेक विद्यार्थी स्कूल में अपने दिमाग को खोल के रखता है और खेल, क्विज़, समूह चर्चा, बहस, निबंध लेखन, भाषण, पर्यटन, यात्राऔर अध्ययन यात्रा आदि जैसे अतिरिक्त गतिविधियों में भाग लेने के द्वारा अपने ज्ञान और कौशल को बढ़ाते हैं।

अच्छा शिक्षक अपने विद्यार्थियों का अच्छा दोस्त भी होता है जो उन्हें सही रास्ता प्राप्त करने में मदद करता है। स्कूल और कॉलेजों में बहुत सारे शिक्षक होते हैं लेकिन कोई एक शिक्षक सभी विद्यार्थियों का पसंदीदा होता है। अनोखे शिक्षण और सिखाने की प्रक्रिया के अपने सामूहिक भूमिका के माध्यम से शिक्षक हमारे शिक्षा का लक्ष्य तय करते हैं। हमारे शिक्षकगण हमको हमेशा सौहार्द में कार्य करने के लिये प्रेरित करते हैं। हमारे शिक्षक हमें समझते हैं और हमारी समयस्याओं को व्यक्तिगत और पेशेवर दोनों तरीके से सुलझाते हैं। वो हमें जीवन के प्रति सकारात्मक नजरिया अपनाना सिखाते हैं। एक अच्छा शिक्षक वो होता है जो अपने पूरे जीवन में विद्यार्थियों को केवल देता है लेकिन कुछ भी लेता नहीं है बल्कि वो अपने विद्यार्थियों की सफलता से बहुत खुश हो जाता है। एक बेहतरीन शिक्षक वो होता है जो अपने राष्ट्र के लिये एक बेहतरीन भविष्य की पीढ़ी उपलब्ध कराता है। केवल उचित शिक्षा से ही सामाजिक समस्याएँ, भ्रष्टाचार आदि को खत्म किया जा सकता है जो अंतत: एक राष्ट्र को वास्तविक विकास और वृद्धि की ओर ले जायेगा।


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